खजूर वृक्षों में नर और मादा फूल अलग-अलग वृक्ष पर आते हैं| एक बीजपत्री होने के कारण खजूर के पौधे कायिक प्रवर्धन यानी vegetative propagation के दूसरे method जैसे grafting यानि कलम बांधना, इस प्रकार की विधियों द्वारा तैयार नहीं किए जा सकते हैं| इसका propagation बीज, ऑफशूट व टिश्यू कल्चर तीन विधियों से ही किया जा सकता है|
बीज द्वारा खजूर पौधे तैयार करना (Prepare Date Palm plant from seed)
बीज से तैयार पौधों
में फल अलग गुणवत्ता के और देर से आते हैं, साथ ही इसके एकलिंगी यानि डायोसियस होने के कारण लगभग आधे नर व आधे मादा हो सकते हैं| बीज से बने खजूर पौधों में फूल आने से पहले उनके नर व मादा का पता नहीं चल पाता है| इसके अलावा दूसरी टिश्यू कल्चर विधि है
जो अधिक महंगी, लगभग 4000-5000 रुपए प्रति पौधा होने
के कारण किसानों के बीच अधिक प्रचलित नहीं है| खजूर पौधे उत्पादन की अंतिम विधि है
ओफशूट के द्वारा, जिससे नए खजूर के पौधों का उत्पादन
अच्छी गुणवत्ता वाले मातृ पेड़ों यानि mother plant के ऑफशूट
द्वारा किया जा सकता है.
ऑफशूट द्वारा खजूर पौधे तैयार करना (Date palm plant production by offshoot)
ऑफशूट द्वारा
तैयार पौधे, mother
plant से गुणवत्ता
में समान होते हैं. यह पूरी तरह से विकसित पेड़ों की जड़ों और तने वाले भाग से निकलते रहते हैं| इस offshoot विधि से तैयार खजूर पौधे में फल बीजू पौधे से 2-3 साल पहले आते है| खजूर के एक
पेड़ से उसके पूरे जीवन में लगभग 15-20 ऑफशूट प्राप्त हो जाते हैं, लेकिन किस्म के आधार पर अलग अलग संख्या में प्राप्त हो सकते है| जो पौधे के रोपण यानि plantation के लगभग 15 साल तक पैदा होते रहते हैं| पौधे लगाने के करीब 4 वर्ष बाद से पौधों की किस्म के आधार पर तीन से पांच ऑफशूट
प्रतिवर्ष अलग किए जा सकते हैं. इस कारण अच्छी गुणवत्ता के ऑफशूट पर्याप्त
मात्रा में उपलब्ध करवाने में दिक्कत भी आती है.
ऑफशूट भी दो
तरीको से निकाला जा सकता है, पहला तरीका गुजरात में प्रचलित है, जिसमें जड़े पूरी तरह विकसित होने के लिए पेड़ों के तने के पास मोस
घास या मिट्टी चढ़ाई जाती है और प्लास्टिक की थैली लगाई जाती है, इसके साथ उसको पानी से लगातार गीला रखा
जाता है| ओफशूट से जड़ें निकलने के बाद mother plant से ऑफशूट को सावधानी से अलग किया जाता
है| दूसरी विधि में ओफशूट लगभग 8-10 किलो वजन और 20-25 सेमी व्यास का हो
जाता है, इसके साथ offshoot पेड़ से हल्का सा अलग
होने लगता है तब पेड़ों की
जड़ों के पास या तने से सब्बल, जो
भाले के समान तीखा और चौड़ा होता है... से हथोड़े की चोट करके पेड़ से अलग किया जाता है. Offshoot निकालने का कार्य जनवरी-फरवरी और जुलाई-अगस्त
में करना सबसे अच्छा रहता है| पेड़ पर लगे ओफशूट के क्राउन
से 4-5 इंच ऊपर से पत्तियाँ काट देनी चाहिए ताकि ओफशूट वजनदार और मोटा मिल सके| अलग किए गए ऑफशूट से भी ऊपर की
पत्तियों को काट देना चाहिए|
इसके बाद इन
ओफशूट को 300 ग्राम carbendazim
50% WP फफूंदनाशी
और 400 ml
chlorpyriphos 20 EC कीटनाशी, इसके अलावा 100 ग्राम इंडोल ब्यूटेरिक
एसिड (IBA) को 100 लीटर पानी की दर से टैंक में मिलाकर सोल्यूशंस बना दिया जाता है| इस सोल्यूशंस में ओफशूट को 20 मिनट तक
डूबा कर रखे| इसके बाद 25X 25 इंच या ओफशूट के नाप की पॉलीबैग में या
सीधे खेत में रोपाई कर देनी चाहिए|
ओफशूट को
पॉलीबैग में डालने के लिए कोकोपिट में परलाइट और वेमिकुलाइट मिला देना चाहिए ताकि खनिज तत्व के साथ वायुसंचार
और जल धारण क्षमता यानि एरियसन और water holding capacity भी बढ़ सके| फिर
इस मिश्रण को ओफशूट लगाकर अच्छी तरह से दबा देना चाहिए और बाद में पानी पिला दे|
ओफशूट पौधे को 3 दिन के अंदर हल्का पानी देते रहना चाहिए ताकि ओफशूट ना मरे और नई
पत्तियाँ निकल सके|
खजूर के पौधे लगाने का सही समय और विधि (Right Time and procedure of Date Planting)
खजूर के पौधे वर्षा ऋतु यानि जुलाई से सितम्बर या बसंत ऋतु यानि फरवरी- मार्च में लगाए जाते है. रोपाई के एक महीने पहले 1 मीटर लम्बे, 1 मीटर चौड़े और 1 मीटर गहरे खड्डे खोद लेने चाहिए| पौधे से पौधे की दूरी 8 मीटर यानि 26 फीट रखी जाती है| हर एक खड्डे में 20 से 25 किलो अच्छी तरह से सड़ी गोबर की खाद, 1.5 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट उर्वरक और दीमक जैसे भूमिगत कीटों से बचाव के लिए लिए पौधा लगाने के तुरंत बाद क्लोरोपरिफोस कीटनाशी 10 मिली प्रति लीटर पानी की दर से सिंचाई कर देनी चाहिए| पौधे या offshoot की रोपाई के वक्त पौधे को गड्डे में रखकर चारों तरफ से मिट्टी में अच्छी तरह दबाकर लगाना चाहिए. पौधे लगाते समय पौधे के बल्ब का केवल तीन चौथाई हिस्सा मिट्टी के अंदर रहे और क्राउन या ऊपर का भाग मिट्टी में नहीं दबे इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए| पौधे लगाने के बाद पानी पौधों के चारों तरफ ही दे तथा पानी पौधे के क्राउन में ना घुसे, नहीं तो जड़ सड़न रोग (Root rot disease) होने की संभावना बढ़ जाती है|
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